इजरायल और फिलिस्तीन मिडिल ईस्ट का ऐसा देश जो पिछ्ले 70 सालों से एक दूसरे से लड़ते आ रहे हैं।

हम आपको बता दें की वर्ल्ड मैप के अनुसार मिडिल ईस्ट जोन में सऊदी अरब, इराक, ईरान, जॉर्डन, इज़ीप्ट, सीरिया,तुर्की आदि देश आते हैं। और इन्हीं में एक देश इजरायल है जो 1948 को पूर्ण रूप से एक देश बना।

आज एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया कोरोना महामारी जैसी आपदा से जूझ रही है वही इजरायल और फिलिस्तीन एक  दुसरे पर बमबारी कर रहे हैं।

इजरायल और फिलिस्तीन की इस खूनी संघर्ष के पीछे की कहानी के बारें में आज हम आपको बताएँगे एक आसान और सरल भाषा में ।

तो आइयें जानते हैं इजरायल और फिलिस्तीन के खूनी संघर्ष के पीछे का राज के बारें में

दराअसल, इजरायल का एक शहर येरुशलम जिसे पुरी दुनिया holy place के नाम से जानती है। क्यूंकि ये जगह यहूदी, मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोगों का पवित्र स्थलों में से एक है।

जहाँ एक तरफ मुसलमानों के लिए अल-अक्सा मस्जिद है तो दुसरी तरफ इसाईयों के लिए सेपुल्कर चर्च और यहूदियों के लिए टेंपल माऊंट हैं। लेकिन इस शहर पर कब्जे की बात करे तो यहाँ इजराइल की सेना का वर्चस्व है।

अल अक्सा मस्जिद, टेंपल माऊंट एवं सेपुल्कर चर्च के  बारें में

अल आक्सा मस्जिद: इस्लाम धर्म के अनुसार यह मस्जिद मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थल है।

यह एक पहाड़ी पर स्थित हैं। इस मस्जिद का सबसे पेचीदा मामला इसके परिसर को लेकर के है क्यूंकि मुस्लिम लोग इसे हरम-अल-शरीफ़ कहते हैं और यहूदी लोग टेंपल माऊंट ।

और दुसरा सबसे बड़ा मसला है बल्फौर घोषणा Balfour Declaration और आपको बता दें कि इसी बल्फौर घोषणा की वजह से यह खूूनी संघर्ष इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चलता आ रहा है। और एक बात यह भी है की जहाँ-जहाँ ब्रिटिश हुकुमत रही हैं कोई न कोई बड़ा मसला क्रिएट किया ही है। जैसे : भारत का  धारा 370 जम्मू-कश्मीर विवाद।

बल्फौर घोषणा Balfour Declaration

बल्फौर घोषणा Balfour Declaration का संबंध ब्रिटिश जनरल सर ऑर्थर बल्फौर से है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1917 में जब ब्रिटेन और ऑटोमन साम्राज्य से युद्ध हुआ तो इस युद्ध में ऑटोमन साम्राज्य की हार हुई।

उसके बाद ब्रिटिश जनरल सर ऑर्थर बल्फौर ने फिलिस्तीन में यहूदियों के लिए “राष्ट्रीय घर” बनाने की घोषणा की जिसे हम बल्फौर घोषणा Balfour Decliration के नाम से जानते हैं।

हालांकि ब्रिटिश जनरल ने अरब को फिलिस्तीन देने का वादा किया। लेकिन अरब ने इस घोषणा का विरोध किया जिससे अरबों एवं यहूदियों में तनाव बढ़ती चली गई।

धीरे-धीरे यह तनाव हिंसा में तब्दील होने लगी। जब 1948 में इजराइल एक देश बन कर उभरा तो अरब राज्योंं को यह गवांरा नही हुआ उन्होनें इजराइल पर हमला कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ की अरब राज्योंं की हार हुई और इजरायल देश का और विस्तार हो गया।

धीरे-धीरे इजरायल मजबूती की ओर बढ़ने लगा उसने वेस्ट बैैंक, गाज़ा पट्टी पर भी अपना अधिपत्य स्थापित किया। और इन्हीं हिंसा के बीच हमास संगठन का उदय हुआ।

हमास संगठन

जब इजरायल और फिलिस्तीन के बीच 1967 में ” सिक्स डे वार “ हुआ तो इसमें इजराइल की जीत हुई। इजराइली सेना ने गोलन हाईट्स, वेस्ट बैंक एवं पूर्वी येरुशलम पर अपना अधिकार जमा लिया।

जिसका नतीजा यह हुआ की यहाँ हमास नाम का एक संगठन ने जन्म लिया जिसका  पूर्ण मकसद इजरायल को नक्शे से मिटाना हैं। और वेस्ट बैंक और गाज़ा पट्टी को मिलाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश की स्थापना करना है।

पूर्वी येरुशलम जहाँ मुस्लिम आबादी ज्यादा है वहाँ पर 1967 के सिक्स डे वार के बाद इजराइली सेना को स्वतंत्र रूप से अधिकार मिल गया और आज भी यह जगह इजरायली सेना के कब्जे में है।

और इसी जगह पर स्थित हैं अल अक्सा मस्जिद। जो बार बार इजरायली सेना का इस मस्जिद पर हमला करते देखा गया है।

और आज जब हमास और इजराइल के बीच जो युद्घ हो रहा है कहीं न कहीं इजराइली सेना इसका जिम्मेदार है। क्योंकि 10 मई को इजरायली सेना ने अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ रहे लोगों पर हमला कर दिया जिसमें करीब 300 लोग घायल हो गए।

इस एवज में हमास ने इजरायल पर हमला किया। और आज स्थिति ऐसी है कि न इजरायल रूकने को तैयार हैं और न ही फिलिस्तीन।

इजरायल और फिलिस्तीन संघर्ष का भारत पर प्रभाव

एक तरफ जहाँ भारत और इजरायल का संबंध रक्षा, विज्ञान,एवं तकनीकी से जुड़ा है वही दुसरी तरफ भारत फिलिस्तीन का संबंध अर्थव्यस्था के क्षेत्र में विकास करना और राष्ट्रनिर्माण एवं संस्थानों को सुदृढ़ करना है।

लेकिन हमास के बमबारी में एक 30 वर्षीय भारतीय  महिला की मौत से भारत भी चिंतित हैं। हालांकि भारत ने दोनो देशों से न लड़ने की अपील की है और संयम बरतने को कहा है।और साथ साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2334 प्रस्ताव का पालन करने का आग्रह किया है।

प्रस्ताव 2334 क्या है?

दराअसल, प्रस्ताव 2334 संयुक्त राष्ट्र संघ परिषद द्वारा पारित एक प्रस्ताव है जो इस बात की पुष्टि करता है की इजरायल और फिलिस्तीन के बीच 1967 के बाद से जो भी अधिकृृृत क्षेत्र हैं जिसमें पूर्वी येरुशलम भी शामिल हैं कोई भी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता हैं।

कुछ शॉर्ट्स नोट्स

इजरायल के बारें में

  • इजरायल में मुस्लिमों की आबादी लगभग 18 लाख हैं जो सभी अरब मूल के मुस्लिम हैं। और इन्हें भी इजरायल में उतना ही अधिकार दिया गया हैं जितना यहूदियों को।
  • इजरायल अपना राजधानी येरुशलम को मानता है लेकिन Officially  राजधानी तेल अविव हैं।
  • इजरायल की कुल आबादी 90 लाख हैं
  • इजरायल के वर्तमान राष्ट्रपति रेवेन रिवलिन और प्रधानमंत्री बेंजामीन नेत्यांन्हू हैं

यह भी पढ़े 

पीएम नरेंद्र मोदी साहब और बोहरा समाज का संबंध

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच छिड़े संघर्ष पर क्या बोला भारत?

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here