महाशिवरात्रि महोत्सव
 

अध्यात्मिक दृष्टिकोण से महाशिवरात्रि महोत्सव का महत्व 

 

महाशिवरात्रि महोत्सव धार्मिक दृष्टिकोण से भगवान शिव की उपासना का बखान करता है। क्यूंकि हिन्दू कथा के अनुसार इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। जिसके फलस्वरूप फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दर्शी के दिन भगवान शिव और माँ पार्वती के साथ विवाह हुआ था। तब से महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता हैं।

 

इसलिए ये हिन्दु धर्म के लोगों लिए एक महत्वपूर्ण उत्सव हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की भक्ति में विलीन होकर जो भी मनोकामनाएँ माँगते हैं वो पूर्ण होता है।

और विधि-विधान से व्रत रखने वालों को धन, सौभाग्य, समृधि,संतान एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि का महोत्सव कब मनाया जाता है?

महाशिवरात्रि का महोत्सव हर वर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दर्शी को मनाया जाता है। लेकिन दक्षिण भारत पंचाग में यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दर्शी को मनाया जाता है । इस प्रकार यह दोनो पंचांग में एक ही दिन पड़ता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महाशिवरात्रि का विशेष महत्व 

 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हर एक वर्ष में 12 से 13 शिवरात्रियाँ आती है लेकिन जो शिवरात्रि फरवरी और मार्च महिने के मध्य में आती है उसे महाशिवरात्रि कहते हैं। शिवरात्रि का अर्थ है हर महिने का 14वाँ दिन जो अमावस्या से एक दिन पहले आता है।

महाशिवरात्रि की रात महत्वपूर्ण क्यों है?

 

सौर मंडल में होने वाली हर चीज का असर कहीं न कहीं हम पर जरूर पड़ता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महाशिवरात्रि की रात सौरमंडल में ऊर्जा प्रकृतिक रूप से ऊपर की ओर उठती है। हर एक जीव अपने भीतर इस ऊर्जा को बढ़ते हुए महसूस करता है ।

लेकिन इस ऊर्जा को सिर्फ़ वही प्राणी उपयोग कर सकता है जिसकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा गया है की मनुष्य का मस्तिष्क का विकास रीढ़ की हड्डी सीधी होने के बाद ही हुआ। इसप्रकार एक मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसकी रीढ़ की हड्डी सीधी है।

इस रात निकलने वाली ऊर्जा से हमें अनेकों प्रकार के फायदे मिलते है। खास कर यह रात उनलोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो अध्यात्मिक मार्ग पर है।अगर हम इस रात सो जाते है तो हमारे शरीर को बहुत ही नुकसान पहुँचता है।

अध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए यह वह दिन है जब भगवान शिव अपने भीतर के सभी हलचलों से परे चले गए थे और पूरी तरह से स्थिर हो गए।

इसी दिन उनकी तीसरी आँख खुली थी। इसलिए हमें भी अपने तीसरी आँख खोलने की जरूरत है ताकि इस ऊर्जा से हम वंचित न रह जाय।

इस रात लोग जागरण क्यों करते हैं या रात भर जागते क्यों हैं?

 

उतरी गोलार्ध में इस रात इंसानी शरीर में ऊर्जा ऊपर की ओर बढ़ने लगता है हर एक जीव अपने अंदर इस बढ़ते ऊर्जा को महसूस करता है जैसे मानसिक रूप से परेशान लोग जो समझते हैं की चाँद पागल बना रहा है। लेकिन ये इसी ऊर्जा का असर होता है।

और भी ऐसी क्रियाएँ है जैसे अगर आप प्रेममय है तो इस निकलते ऊर्जा के कारण आप ज्यादा प्रेममय दिखाई देते हैं।

अगर आप थोड़े ध्यानमय है तो इस दिन ज्यादा ध्यानमय नजर आयेंगे।

इसलिए इस रात जागने के लिए जागरण का तरीका अपनाया गया है। लोगों को जगाने के लिए हम तरह तरह के मनोरंजन का इन्तजाम करते हैं  जैसे: भक्ति,संगीत, नृत्य इत्यादि।

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