मॉबलिंचिंग हमारे समाज को कितना आघात पहुँचा रहा है? इसमे शामिल मानवभक्षी क्या इसी समाज के है जो सदियों से हमारे साथ रहने का ढोंग कर रहे है? क्या इन्हें लगता है कि ये सब करने से इन्हें धार्मिक आजादी मिलेगी? आखिर ये लोग कौन है और ऐसा क्यूँ कर रहे है?

इन सारी बातों ने मुझें अन्दर से ऐसा झकझोरा है जैसे किसी हरे पेड़ की डाली पर कोई खतरनाक कीड़ा उस पेड़ को अन्दर ही अन्दर खोखला किये जा रहा है। इन्हीं सब बातों के लेकर मेरी कुछ अपनी राय है जो आपलोगों के बीच मैं रख रहा हूँ ताकि इस माॅबलिंचिंग को जड़ से उखाड़ा जा सके।

माॅबलिंचिंग क्या हैं ?

माॅबलिंचिंग यानि किसी भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को पिट-पिट कर हत्या करना। चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

माॅबलिंचिंग ये जो शब्द है, आए दिन यह एक कोरोना जैसी महामारी का रूप लेता जा रहा हैं जो इस समाज के लिए एक चिंता का विषय है। जैसे आज महाराष्ट्र के पालघर में संत शुशील गिरि, कल्पवृक्ष गिरि, निलेश तेलगड़े नामक साधुओ की हत्या से पुरा देश में आक्रोश का माहौल बना हुआ है जिसे बच्चा-चोर गिरोह के नाम पर एक भीड़ ने मार डाला।

वैसे ही मो.एख्लाक जो UP का रहने वाला था बीफ खाने के शक में उसे मार दिया गया, मो. तबरेज जिसे बाईक चोरी के नाम पर मार दिया गया ऐसे बहुत सारी घटनाएँ है जो पिछले कई सालो से घटित हो रही है लेकिन सरकार का इसपर एक ही टिप्पणी आती है इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

उसके कुछ दिन बाद ही मामला शांत हो जाता हैं। आज देश में गौरक्षा के नाम पे, लव जिहाद के नाम पे, दलित हो या आदीवासी के नाम पे या किसी भी चोर गिरोह के नाम पे जैसे-बच्चा चोर, बाईक चोर ऐसी कितनी सारी घटनाएँ घट चुकी है जिसमें बहुत सारे लोग मारे जा चुके है।

जिसमें सबसे ज्यादा मरने वाले मुसलमान ही है(मिडिया आँकड़ा के अनुसार) जिनमें  किसी को गाय तस्कर या गौ मांस के नाम पे मारा गया। लेकिन हमारे लोकतंत्र में ऐसे घटना में शामिल अपराधी को नेेतागण फुल माला पहनाकर हौसला अफजाई करते हैैं।

सरकार द्वारा इस पर अभी तक कोई ठोस कानून नहीं बनाया गया है ऐसा क्यूँ? क्या यह एक जघन्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता? आज कितने सारे लोग चाहे वो किसी भी धर्म, जाति के हो चाहे कोई साधु हो या कोई मौलाना हो इस घटना के शिकार हो गए लेकिन ये अपराधि कुछ दिन जेल में रहकर फिर रिहा हो जाते है।

ऐसे मेें इन्हे कानून से कोई डर ही नही लगता। आज तो स्थिति ऐसी हो गई है कि कहीं आने-जाने के क्रम में किसी से बातचीत के दौरान अपना नाम, जाति, धर्म बताने में भी डर लगता है। अगर सबलोग यहीं कहने लगे कि हमें कुछ नहीं होगा तो फिर ऐसी घटना का तो होना लाजमी हैं चाहे वो किसी भी धर्म के हो।

नए आँकड़ो के हिसाब से आज देश में मॉबलिंचिंग का प्रतिशत मुस्लिम(50.8%), दलित(7.9%), सिक्ख एवं हिन्दू(4.8%), क्रिश्चियन(1.6%)।

अगर इस पे कानून द्वारा अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में ये एक भयंकर महामारी (मानव द्वारा गठित)का रूप ले लेगा जिसका जिम्मेदार हमारे कानून के रक्षक होंगे।

ऐसी घटना को रोकने के लिए सरकार को इस विषय पे गहरा मंथन करके कोई ठोस कानून बनाना चाहिए। ताकि कभी भी कोई ऐसी घटना का अंजाम देने से पहले बार-बार सोंचे।

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