पीएम नरेंद्र मोदी साहब और बोहरा समाज संबंध

इस दुनिया में इस्लाम धर्म के मानने वाले बहुत हैं। लेकिन आपको पता होना चाहिये कि इस्लाम धर्म दो भाग में बँटा हैं सुन्नी समुदाय और शिया समुदाय। शिया समुदाय का ही एक अंग बोहरा समाज है 

 

और ये दोनो समुदाय में कभी भी एक नही बनी हैं। इनके पीछे का कारण तो बहुत है लेकिन इसका प्रमुख कारण की शुरुआत हजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम (पैगम्बर मोहम्मद साहब) के वफ़ात के बाद पैदा हुआ। 

 

जब हजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम( (पैगम्बर मोहम्मद साहब) इस दुनिया से पर्दा कर गए तो मुसलमानों में विभेद पैदा हो गया। 

 

जब तक हजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम  (पैगम्बर मोहम्मद साहब) इस दुनिया में थे सब एक हुए करते थे लेकिन इनके वफ़ात के बाद मुसलमान दो समुदाय में बँट गए। और यही से विवाद उत्पन्न हुआ। 

 

 

सुन्नी और शिया में अंतर 

 

 

सुन्नी समुदाय 

 

पैगम्बर मोहम्मद साहब के बनाये रास्ते पर चलने वाले मुसलमानो को सुन्नी कहा जाता हैं।

 

पुरे दुनिया में सुन्नी मुसलमानों की संख्या लगभग 80% हैं। सुन्नी मुसलमानो का मानना है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब को इस दुनिया में होनी वाली हर परिवर्तन के बारें में पता था। उन्हें हर चीज के बारें में पता था क्यूंकि वे अल्लाह के आखिरी रसूल थे।

 

पैगम्बर मोहम्मद साहब के वफ़ात के बाद इनके ससुर हजरत अबू बकर सुन्नी मुसलमानों के खलीफा बने। इन्होनें मुसलमानों को पैगम्बर मोहम्मद साहब के बनाये रास्ते पर ही चलने का अनुरोध किया।  

 

 

शिया समुदाय 

 

पुरे दुनिया में शिया मुसलमानों की संख्या लगभग 20% हैं। ये मानते हैं कि जिस तरह अल्लाह ने पैगम्बर मोहम्मद साहब को  रसूल(पैगंबर) बनाकर इस दुनीया में भेजा हैं उसी तरह हजरत अली को भी रसूल बनाकर भेजा हैं। 

 

इसलिए ये उनके बताये हुए रास्ते पर नही चलते। ये अपने इमामो के द्वारा बनाये हुए कानून पर चलते हैं।

 

पैगम्बर मोहम्मद साहब के वफ़ात के बाद इन्होनें हजरत अली को अपना इमाम चुना। यही से इस्लाम दो भाग में बँट गया। शिया मुसलमानो का मानना है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब को इस दुनिया में होनी वाली हर परिवर्तन के बारें में पता नही था।

 

बोहरा समाज

 

बोहरा समुदाय मुसलमानों का एक अलग फिरका है बोले तो एक अलग पंथ हैं जिसमें शिया और सुन्नी दोनो हैं।

 

बोहरा समुदाय के सुन्नी मुसलमानों को सुलेमानी बोहरा कहा जाता है। लेकिन शिया बोहरा को दाऊदी बोहरा कहा हैं।

 

बोहरा समाज का भारत में उदय 

 

बोहरा समुदाय खूद को मुहम्मद साहब (570-632ई ) के वंशज मानते हैं। ये भारत में 11वीं शताब्दी में उत्तरी मिस्र से धर्म प्रचार के लिए भारत आये। 

 

जब ये यहाँ सफल होने लगे तो 1539ई में ये अपना मुख्यालय यमन से हटाकर भारत के सिद्धपुर में लाये। 

 

1588 में दाऊद बिन कुतुब शाह और सुलेमान के अनुयायियों के बीच विभेद होने के कारण बोहरा समुदाय भी दो भाग में बँट गया। 

 

सुलेमानी बोहरा समुदाय 

 

इस समुदाय के सभी मुसलमान अबू हनीफ़ा के बनाए इस्लामिक कानून को मानते हैं। आपको बता दे की पैगंबर मोहम्मद साहब के बाद जो सुन्नी मुसलमानों के चार खलीफा बने उनमें एक अबू हनीफ़ा भी थे। सुलेमानी बोहरा के प्रमुख यमन में रहते हैं।

 

दाऊदी बोहरा समुदाय 

 

यह समुदाय शिया समुदाय के इमामों के द्वारा बनाये कानून को मानते हैं। दाऊदी बोहरा पुरी तरह शिया समुदाय ही हैं। ये पढ़े-लिखे, समृध संपन्न होते हैं।

 

ऐसे तो इन्हें व्यापारियों के नाम से ही जाना जाता है । क्यूंकि इनलोगों का मुख्य पेशा व्यापार ही हैं। 

 

भारत में ज्यादातर दाऊदी बोहरा ही हैं जिनकी संख्या लगभग 15 लाख के करीब हैं। जो महाराष्ट्र, गुजरात,राजस्थान और मध्य प्रदेश में ज्यादा हैं।

 

दाऊदी बोहरा के अंतिम एवं 21वें इमाम तैयब अबुल कासिम थे। उसके बाद अध्यात्मिक गुरूओं की परम्परा चलने लगी। जो दाई-अल-मुतलक सैयदना कहलाते हैं ।

 

दाई-अल-मुतलक का अर्थ है सुपर अथॉरिटी यानि सर्वोच्च शासन । इसका मतलब है की जिसके निजाम में कोई भी भीतरी या बाहरी शक्ति दखल नहीं दे सकती या जिसके आदेश-निर्देश को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती। सरकार या अदालत के समक्ष भी नहीं। 

 

धर्मगुरु सैयदना 

 

 

बोहरा समुदाय में सैयदना एक पद होता है जो पुरे बोहरा समाज का सर्वोच्च नेता होता हैं। जिनके दिशा निर्देश पर पुरा बोहरा समुदाय काम करता हैं। 

 

सैयदना का फैसला ही सर्वोच्च फैसला होता हैं । भारत में वर्तमान में बोहरा समुदाय के धर्मगुरू सैयदना मोफद्दल सैफुद्दीन हैं जो दाऊदी बोहरा समाज के प्रमुख सैयदना डा. मोहम्मद बुरहानुद्दीन के वफ़ात के बाद अभी तक कायम हैं।

 

सैयदना डा. मोहम्मद बुरहानुद्दीन इंसानियत के मिशाल थे उनके शासन काल में बोहरा समाज को एक नया दिशा मिला।

 

पीएम नरेंद्र मोदी और सैयदना का संबंध 

 

ज्यादातर बोहरा समुदाय के लोग गुजरात के वडोदरा, सुरत इत्यादि जगहों पर निवास करते हैं। और हमारे देश के प्रधानमंत्री जी भी गुजरात से ही हैं। 

 

जब पीएम साहब गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब इनके कार्यकाल के दौरान व्यापारी समूह के लिए बहुत सारें काम किये गये जिनसे इन बोहरा समाज को बहुत फ़ायदा हुआ।

 

क्यूंकि बोहरा समुदाय के अधिकांश लोग व्यापारी ही हैं। तब से बोहरा समुदाय के लोग BJP पार्टी के करीब होने लगे और पीएम साहब इनलोगों के चहेता बन बैठे। 

 

और आज पुरे दुनिया के बोहरा समुदाय के लोग पीएम साहब को बहुत प्यार करते है। इनका बहुत इज्जत करते हैं। इसलिए पीएम नरेंद्र मोदी साहब भी इनसे मिलने का कोई कसर नही छोड़ते। 

 

हाल ही में भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ की देश का प्रधानमंत्री बोहरा समाज के धार्मिक सम्मेलन मुहर्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने इनलोगों के दिलों में घर बना लिया हैं।

 

 

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