बुर्ज़ खलीफा

बुर्ज़ खलीफा दुनिया की सबसे ऊँची इमारत में से एक हैं जो दुबई में स्थित हैं. इसकी ऊँचाई 830 मीटर हैं. दुबई जो की एक खाड़ी देश हैं जहाँ चारों तरफ रेगिस्तान ही नजर आते हैं लेकिन इस रेगिस्तान भरी जगह में इतनी ऊँची इमारत बनाना कितना मुश्किल भरा होगा शायद आप नही जानते.

आज हम आपको बताएँगे दुबई में स्थित बुर्ज़ खलीफा के बारें में जिसे बनाने में मात्र 6 साल लगे

 

जिस जगह पर आज बुर्ज़ खलीफा को बनाया गया है पहले वहाँ दुबई का मिलिट्री हेडक्वाटर हुआ करता था.

 

जब बुर्ज़ खलीफा का कंस्ट्रक्शन का काम 2004 में शुरु हुआ तो इन्जीनियरस को उस रेतीली भरी जगह में इतना ऊँचा इमारत बनाना असंभव सा लग रहा था. 

 

क्यूंकि इतनी ऊँची इमारत बनाने के लिए यह जगह फिट नहीं बैठ पा रही थी इस ज़मीन के नीचे छोटे-छोटे रेतीले कमजोर पत्थर होने के कारण इमारत को मजबूती नही मिल पायेगी ऐसा इन्जीनियरस का मानना था. 

 

लेकिन इसका हल तुरंत निकाल लेने के बाद इस इमारत की जड़ को मजबूत बनाने के लिए 192 स्टील पाइल्स का इस्तेमाल किया गया जो ज़मीन से करीब 50 मीटर नीचे लगाया है यह स्टील पाइल्स फ्रिकशन(friction) पद्धति पर आधारित है.

 

 

 

पूरे बिल्डिंग का भार इन्हीं स्टील पाइल्स पर हैं इसके बाद धीरे-धीरे बिल्डिंग का कंस्ट्रक्शन का काम शुरु हुआ.

 

जब धीरे-धीरे यह बिल्डिंग अपनी ऊँचाई छूने लगी तो स्ट्रकचर बनाने में दिक्कत होने लगा तो इस स्ट्रकचर को बनाने का काम दुनिया की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन आर्किटेक्ट कम्पनी Emaar ने इसे Buttress structure की पद्धति पर बनाया.

 

उसके बाद भी इमारत बनाना आसान नहीं था क्यूंकि स्ट्रकचर के लिए कंक्रीट पहुँचाना बहुत बड़ी समस्या थी ये कंक्रीट ऊपर जाते ही सुख जाती थी इसे ठीक करने के लिए दुनिया की सबसे पावरफूल पम्पस का इस्तेमाल किया गया जो काफी कारगर साबित हुआ.

 

जब पूरी बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई तब इसमें खिड़की लगाने की बात आई जब इसमें खिड़की लगाई जाने लगी तो इस बिल्डिंग का टेंमप्रेचर 100॰C चला जाता था जिसमें किसी भी आदमी को रह पाना ही असंभव था.

 

ऐसे में करीब 18 महीने तक काम रूक जाने के बाद एक जॉन जोफ्रा नामक इन्जीनियर ने इस ग्लास पैनल को बनाने का काम शुरू किया.

 

उन्होनें एक ऐसी ग्लास का निर्माण किया जो सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रा व्यालेट किरण (UV Rays) को बिल्डिंग से परिवर्तित(reflect) कर देती थी.

 

लेकिन यह विंडो पैनल बहुत महंगा था एक विंडो पैनल का कीमत करीब 2000$ था और इस बिल्डिंग में 24000 विंडो पैनल लगाना था इसलिए इसे बनाने के लिए अलग फैक्ट्री का निर्माण किया गया तब जाके इस पूर्ण बिल्डिंग का निर्माण किया गया.

 

इस इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर 136 मीटर का स्टील रड लगाया गया है जो करीब 350 Ton का हैं जिसे बुर्ज़ खलीफा के बीचों-बीच लगाया गया हैं.

 

बुर्ज़ खलीफा को बनाने में हर दिन 12000 वर्कर्स, इन्जीनियरस काम करते थे इसे बनाने वाले कंस्ट्रक्शन मैनेजर का नाम डेविड ब्रैडफ़ोर्ड हैं.

 

इस इमारत को बनाने में पूरा खर्च करीब 1.5 Billion डॉलर हुआ था जो करीब 114 अरब भारतीय रुपये के समान हैं.

 

इस इमारत में दुनिया की सबसे तेज़ चलने वाली एलीवेटर का इस्तेमाल किया गया हैं.

 

बुर्ज़ खलीफा किस सीमेंट की बनी हैं?

इस इमारत को बनाने में दुनिया के सबसे उच्च स्तर के सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है जिसका नाम C60 और C80 कंक्रीट हैं इसके साथ पोर्टलैंड सीमेंट और फ्लाई फ़िश का भी का नाम आता हैं.

 

बुर्ज़ खलीफा पे तिरंगा रंग क्यों किया जाता है?

 
दुबई में भारतीयों की लगभग संख्या 27% हैं ये लोग कहीं न कहीं दुबई में कार्यरत हैं और भारत सरकार से अच्छी मित्रता के कारण दुबई सरकार यहाँ बस रहे भारतीयों के लिए तिरंगा झंडे का advertisment करवाती हैं. 
 
 
आपको बता दें कि एक advertisment का खर्च लगभग 250000 दिरहम होता है जो लगभग भारतीय रुपया में 50 लाख के करीब होगा.

ऐसी ही रोचक तथ्यों को जानने के लिए हमें motivate करते रहें और हमारे लिखें गए आर्टिकल के बारें में जरूर कमेंट करें, follow करें, बने रहे हिंदी सफ़र के साथ ।

धन्

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