Happy Easter(ईस्टर)
 

ईसाई धर्मावलंबियों का प्रमुख पर्व क्रिसमस की तरह Easter(ईस्टर) भी महत्वपूर्ण पर्व में से एक हैं। जिस तरह क्रिसमस त्योहार ईसा मसीह के जन्म के खुशी में मनाया जाता है उसी तरह ईस्टर भी। फर्क ये है की ईस्टर के दिन ईसा मसीह मर कर जीवित हुए थे।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं। यहाँ सभी धर्म के लोगों को स्वतंत्र रूप से हर पर्व को मनाने की आजादी हैं। और सभी धर्म के लोगों के हित की रक्षा के लिए संविधान की रचना की गई है। भारत में ईसाई धर्म को मानने वालों की जनसंख्या लगभग 2.78 करोड़ हैं यानी 2.30%।

तो आज हम बात करेंगे ईसाई धर्म के बारें में जिनकी संख्या भारत में बहुत कम देखने को मिलता है। ईसा मसीह के मानने वाले धर्म को ईसाई धर्म कहा जाता है।

Easter (ईस्टर) पर्व के मौके पर कुछ ऐसी बातें जिनके बारे में आप नही जानते  तो आइये जानते हैं ———

 

Happy Easter (ईस्टर)

 

जिस तरह ईसाई धर्मावलंबीयों का सबसे महत्वपूर्ण  पर्व क्रिसमस हैं उसी तरह Easter (ईस्टर) भी बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। 

 

इस साल 2021 में ईस्टर Sunday 4 अप्रैल को मनाया गया है।

 

क्रिसमस त्योहार भी ईसा मसीह के जन्म के खुशी में मनाया जाता है और ईस्टर पर्व भी। लेकिन फर्क ये है की ईस्टर के दिन ईसा मसीह मर कर जीवित हुए थे।

 

यानि इसाईयों के धर्मग्रंथ बाईबिल के अनुसार ईसा मसीह को गुड फ्राइडे के दिन ही येरुशलम के पहाड़ी पर सूली पर चढ़ाया गया था। जिससे उनकी मौत हो गई।

 

लेकिन इसके तीन दिन तक कब्र में दफ़न होने के बाद ईसा मसीह फिर से जीवित हो उठे थे। उसी दिन को ईसाई धर्म के लोग Easter (ईस्टर) पर्व के रूप में मनाते हैं। ईसाई धर्म के लोग गुड फ्राइडे को पवित्र शुक्रवार मानते हैं।

 

ईसाई धर्म में 40 दिन तक ईस्टर पर्व मनाने की परंपरा है ऐसा इसलिए कि ईसा मसीह जब तीन दिन तक कब्र में दफ़न होने के बाद फिर से जीवित उठे तो उसके बाद वे 40 दिन तक अपने शिष्यों के साथ रहें। 

 

धर्मग्रंथ बाईबिल के अनुसार जब वे अपने शिष्यों के साथ रह रहे थे तब उस दौरान उन्होनें अपने शिष्यों से कहा था की उनका संदेश पूरी दुनिया को पहुँचाये। 

 

ईसा मसीह निर्दोष होते हुए भी क्रॉस पर चढ़ाए गए क्यूंकि इनके विरोधी इनसे ईर्ष्या करते थे। वे इंसानियत के राह पर चलने वाले के लिए पथवाहक थे। 

 

वे लोगों के दुख मुसीबतों में हमेशा साथ देते। वे हमेशा शांति का उपदेश देते। इसलिए इनके विरोधी इनसे जलते थे।

Happy Easter (ईस्टर)पर्व की कुछ खास बातें 

 

 

Easter (ईस्टर)पर्व के शुभ अवसर पर चर्चों को खास रूप से सजाया जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के मानने वाले चर्च जाकर प्रार्थना करते हैं।

 

इस दिन ईसाई लोग खजूर के डाल को चर्च लेकर जाते हैं और राजा के रूप में ईसा मसीह का स्वागत करते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं की बाईबिल के अनुसार जब ईसा मसीह येरुशलम आये थे तब लोगों ने उनका स्वागत खजूर के डाल बिछा कर किया था।

 

इस खास दिन पर ईसाई धर्मावलंबी चर्च में मोमबत्ती जलाते हैं और घर में भी मोमबत्तियाँ जलाते हैं। 

 

इस दिन ईसाई लोग उपवास रखते है और उपवास के दौरान प्रार्थना में अध्यात्मिक मार्ग पर लौटने, गलतियों के लिए क्षमा माँगने, और विलासता के जीवन का त्याग करने का संकल्प लेते हैं।

 

इस दिन चर्चों में बाईबिल का पाठ भी पढ़ा जाता हैं।और एक खास बात इस दिन चर्च के पादरी चर्च में आने वाले लोगों का पैर भी धोते है। ऐसा इसलिए ताकि ईसा मसीह ने जो इन्हें सिखाया हैं उन्हीं के रास्ते पर चल सके। 

 

इस खास मौके पर अंडे का एक अलग ही महत्व है। आज के दिन ईसाई लोग अंडे सजाकर एक दुसरे को उपहार के रूप में देते है उनका मानना है कि अंडे अच्छे दिनों की शुरुआत और नये जीवन का संदेश देती है ।

ईसा मसीह के मृत्यु का जिम्मेदार कौन ?

 
 

ईसा मसीह के मृत्यु के जिम्मेदार उनके 12 शिष्यों में से एक जो उनके बहुत करीबी थे जिनका नाम था Judas (जुडस)। 

 

जुडस ने 30 चाँदी के सिक्के के लालच में ईसा मसीह को पकड़ावाया था। जब उनकों इस बात का पता चला की उनकी गलती के कारण ईसा मसीह को सजा मिली है तो उन्हें बहुत पछ्तावा हुआ।

 

उसने उस 30 चाँदी के सिक्के को वापस करना चाहा लेकिन उनके घोर विरोधी ने वापस नहीं लिया। अन्त में उसने कहा की मैने आज निर्दोष रक्त का सौदा कर पाप किया है। 

 

उसके बाद उसने उन सिक्कों को मन्दिर में फेंक कर फांसी लगा ली। उन्हीं सिक्कों से आयोजकों ने वहाँ एक जमीन खरीदी जो रक्त की जमीन के नाम से जाना जाता है।

 

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