उपवास कितना जरूरी

प्राचीन काल से ही दुनिया में उपवास रखने की परंपरा है जो आज तक इस परंपरा को हम निभाते आ रहे हैं लेकिन शायद इसके बारे में हमें ठीक से पता नहीं है.

 

कुछ लोगों को इसके फायदे के बारें में पता है तो वह उपवास रहते हैं लेकिन कुछ लोगों को इसके बारे में पता नहीं है तो उपवास नहीं रखते उन्हें लगता है कि वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाएंगे.

 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार शाकाहारी लोगों की तुलना में मांसाहार करने वाले लोगों को हमेशा एक लंबा उपवास करने के लिए कहा गया है.

 

ऐसा इसलिए कहा गया है कि मांस को हमारे शरीर में पचने में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लगता है इसलिए हमें एक लंबे अंतराल के बाद ही मांस खाना चाहिए लेकिन हम लोग ऐसा करते नहीं हैं.

 

आपको जानकर हैरानी होगी कि एक अजगर सांप भी अगर किसी बड़े जीव को खाता है तो उसके 15 दिन बाद ही वह किसी दूसरे जीव को खाता है.

 

इसलिए कहा गया है कि मांसाहार करने वाले लोगों को हमेशा एक लंबा उपवास करना चाहिए.

 

हमारे शरीर का पाचन सिस्टम हर समय एक जैसा नहीं रहता क्योंकि हम प्रतिदिन कुछ ना कुछ अपशिष्ट चीजों को खाते रहते हैं जो हमारे पाचन प्रक्रिया को गड़बड़ कर देता है जिससे हमें तरह-तरह के रोग उत्पन्न होते हैं.

 

इसलिए आज हम उपवास को लेकर कुछ बातें बताना चाहते हैं तो आइए देखते हैं उपवास के बारे में

उपवास क्या है ?

जब हम भोजन का पूर्ण और आंशिक रूप से त्याग कर देते हैं तो उसे हम उपवास कहते हैं.

 

उपवास का महत्व हमारे शरीर में सूरज को निकलने जैसा है जिस तरह सूरज हमलोगों को प्रकाश देता है उसी तरह उपवास भी हमारे शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है.

 

उपवास हमारे शरीर की शुद्धि करने की एक प्रक्रिया है जिस का महत्व हमारे लिए बहुत ही बड़ा है.

 

जब भी आपको महसूस हो की हमारे शरीर में कुछ तरह की गड़बड़ी महसूस हो रही है या कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा है तो उस क्रिया में हमें अपने शरीर को रेस्ट देना चाहिए यानि को हमें उपवास रहना चाहिए ताकि हमारा पाचन क्रिया सही रूप में हो जाए ऐसा करने से हमारे शरीर की सारी गड़बड़ियां ठीक हो जाते हैं.

 

इस्लाम धर्म में इसे रोजा का रूप दिया गया है और इसे एक फर्ज के तौर पर पूरे 30 दिन रहने की हिदायत दी गई है.

 

इसमें कहा गया है कि रोजा रखने से हैं इंसानी शरीर में सेल्फ पावर बेहतर हो जाता और हमारे शरीर का ब्रेन पावर भी अच्छा काम करने लगता है.

 

इस्लाम धर्म के अनुसार रोजा रखना अल्लाह की इबादत करना है(इसमें सिर्फ उपवास का ही जिक्र नही है इसके साथ नमाज, इबादत भी शामिल है) जिससे हमारा मन शांत रहता है और हम बुरी आदतों से भी बचते हैं.

 

अगर ऐसा लगता है कि हम रोजा रखने से कमजोर हो गए हैं तो यह हमारा भ्रम होता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हम जिस्मानी तौर पर खुशमिजाज हो जाते हैं.

 

कैंसर खात्मे में उपवास कितना जरूरी ?

 
एक जापानी बायोलॉजिस्ट जिन्हें 2016 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया जिनका नाम  Yoshinori  ohsumi है.
 

उन्होंने अपने शोध में यह पाया कि रोजा रखने से या भूखे रहने से हमारे बॉडी में Nutrients की कमी हो जाती है जो इस Nutrients को पूरा करने के लिए बॉडी में मौजूद कुछ सक्रिय सेल्स, खराब सेल्स को खाना शुरू कर देते हैं

 

जिससे हमारे शरीर के सभी खराब सेल्स खत्म हो जाते हैं. इसी प्रोसेस को उन्होंने” Auto Phasy” नाम दिया जिसे “Self Eating” भी कहा जाता है.

 

उन्होंने यह भी बताया कि 1 साल में 20-25 दिन तक 14-15 घंटे उपवास करने से हमारे जिस्म में कैंसर होने की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं.

 

इसलिए मेरा मानना है कि आप लोग अगर धार्मिक दृष्टिकोण से उपवास रखने के लिए इच्छुक नहीं है तो कम से कम अपने शारीरिक फिटनेस को मजबूत रखने के लिए उपवास करें.

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